नया शौध – बीडी , सिगरेट पिने वाले पिता के बच्चे में हो सकते है ये भयंकर रोग

गर्भावस्था के दोरान  महिलाओ को धुम्रपान  न करने कि सलाह दी जाती है परन्तु नया शौध कहता है अगर पिता भी धुम्रपान करता है तो उसके बच्चोमें आनुवांशिक बीमारियाँ होने कि  सम्भावना रहती है।

चूहे पर किये गये इस अध्ययन में पाया गया कि धुम्रपान करने वाला व्यक्ति तो स्वस्थ रहता  है , परन्तु इसके कारण उसके बच्चो में अटेंशन डिफिसिट , हाइपरएक्टिविटी और कोगनिटिव इनफ्लेक्सीविटी जैसी आनुवांशिक बीमारियाँ हो सकती है

आज भी डॉक्टर पुरुषो को धुम्रपान न  करने कि  सलाह नहीं  देते है  कि उनके  बच्चो में ये रोग हो सकते है , आज के समय बच्चो  में आनुवांशिक बीमारियाँ बढ़ी है इसका कारण उनकी एक या  दो पीढ़ी पहले धुम्रपान का  होना हो  सकता है।

आखिर क्या  है  अटेंशन डिफिसिट

इसको सामान्यतौर पर एडीएचडी कहा जाता है  और यह  दिमाग से  जुडा रोग है  इसकी सम्भावना बच्चो और  वयस्कों दोनों में रहती है।  हालाँकि बच्चो   में इसके होने के ज्यादा चांस होते है।  एक शौध किया  गया उसमे बताया कि  भारत में हर 20 में से एक व्यक्ति इस रोग का शिकार  है। इस रोग के  कारण व्यक्ति  कि  याददाश्त कमजोर हो जाती है।  और यह व्यक्ति या बच्चा लगातार एक जगह अपना ध्यान नहीं बनाये रख सकता है।

वैसे अटेंशन डिफिसिट का निशिचित कारण  अभी तक पता नहीं चला है  लेकिन होरमोन का असंतुलन और आनुवांशिक कारण  इसके होने के माने जाते है 

क्या हो सकता  है अटेंशन डिफिसिट का इलाज

अगर आपको पता  लगे  कि आपके  बच्चे को पढने में दिक्कत पेश हो रही  है वो लगातार पढाई  और अन्य कामो पर ध्यान  नहीं लगा पा रहा है तो डॉक्टर  कि सलाह लेने कि जरुरत है अटेंशन डिफिसिट कि  समस्या बच्चो में कोई साधारण बात नहीं अगर ऐसे लक्ष्ण दिखे तो जल्द से जल्द मनोचिकित्सक  के  पास जाने में  ही भलाई है।  अटेंशन डिफिसिट को  ठीक करने केलिए मेडिसिन कि हेल्प ली जाती है और इससे जुडी कई थेरेपी भी  होती  है जैसे –  साईकोथेरेपी ( काउंसलिंग ),  डांस थेरेपी ,  प्ले थेरेपी आदि। अटेंशन डिफिसिट के लक्षण दिखाई देने पर भी मनोचिकित्सक कि सलाह ले। 

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