Mahabharat – दुर्योधन को भीम ने नहीं इसने मारा था

महाभारत का युद्ध कुरुवन्सियो में हुआ था . ये कुरुवंशी ही आगे कोरव और पांडव कहलाये थे .धृतराष्ट्र ओए पांडू दो भाई थे . धृतराष्ट्र के पुत्र और समन्धि कोरव कहलाये जबकि पांडू के पुत्र पांडव कहलाये . पांड्वो ने धृतराष्ट्र से अपना हक़ माँगा तो दुर्योधन ने देने से मना कर दिया था . इसके बाद पांड्वो के पास युद्ध के सिवाय कोई और विकल्प नहीं था . इसलिए पांड्वो और कोरवो के बिच कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ था . मित्रो ऐसी कहानिया बताई जाती कि दुर्योधन को भीम पांडव ने मारा था पर यह पूर्ण सत्य नहीं है हम आपको इसका पूर्ण सत्य बताने जा रहे है —

Mahabharat - दुर्योधन को भीम ने नहीं इसने मारा था

मित्रो द्रोपती के चिर हरण के समय भीम ने दुर्योधन को मारने कि कसम खायी थी . और उन्होंने उन्होंने कहा था कि मै तेरे पैरो को इस तरह तोड़ दूंगा कि तू कभी चलने लायक नहीं रहेगा . महाभारत के युद्ध के अंत में केवल कोरवो कि और से दुर्योधन ही बचा था उसके 99 भाइयो को पांडवो ने मार दिया था . दुर्योधन और भीम के बिच अंतिम युद्ध हुआ था . जिसमे भीम विजयी रहा था . और भीम ने दुर्योधन कि टांगो को गधा के वार से पूरी तरह तोड़ दिया था . और उसको अधमरा करके वहीं पर मैदान में छोड़ दिया .

इसके बाद पांडव और श्रीकृष्ण भगवान वहां से चले जाते है और दुर्योधन के पास अश्वथामा आता है और वह दुर्योधन से वादा करता है मै आपको पांचो पांड्वो के सर लाकर दूंगा जिनको तोड़कर आप अपनी इच्छा पूरी कर सकते है . अश्वथामा जब पांड्वो को मारने के उनको अभ्याश क्षेत्र कि और जाते है और पांड्वो के कक्ष में प्रवेश करते है और वहा पर सोये हुए पांडवो के पुत्रो को भूल से मार देते है

मारने के बाद अश्वथामा को पता चलता है कि उसने तो पांड्वो के पुत्रो को मार डाला वो कुछ देर वहां पर अफ़सोस करते है इसके बाद सोचते है कि दुर्योधन तो हिल नहीं सकता है उसको कैसे पता चलेगा कि ये पांड्वो के सर नहीं है यह सोचकर अश्वथामा पांडवो के पुत्रो के सर लेकर दुर्योधन के पास चले जाते है और दुर्योधन ने कहते है कि मेने सभी पांड्वो को मार डाला है और उनके सर आपके लिए लाया हु .और भीम के पुत्र का सर दुर्योधन को देता है

दुर्योधन सर देखकर पहचान जाता है कि यह सर भीम का नहीं तो वह अश्वथामा से पूछता है कि तूने मुझसे झूठ क्यों बोला , तो अश्वथामा अपनी भूल कि माफ़ी मांगता है इस पर दुर्योधन ने कहा मित्र मै भीम के वारो से नहीं मरा तूने मुझे सच में मार दिया . आज से यह दुनिया तो यही सोचेगी कि दुर्योधन को भीम ने मारा पर मित्र सचाई यह है तूने मेरी हत्या कि है . इसके बाद दुर्योधन मृत्यु को प्राप्त हो जाते है .

मित्रो ये सभी बर्बरीक ही जानते थे क्योंकि उनका सर पूरे महाभारत युद्ध को अंत तक देख रहा था .

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