अजब गजब – अन्तरिक्ष में बढ़ जाती है लम्बाई और कान हो जाते है गोल

अन्तरिक्ष में जाने का हर किसी का सपना होता है . परन्तु अभी तक अन्तरिक्ष तक पहुँचने का सपना कुछ लोग ही पूरा कर पाए है जिसमे सबसे पहले नील का ही आता है जिन्होंने सबसे पहले चाँद पर अपने कदम रखे थे . इसके बाद कुछ गिने चुने लोग ही यह सफ़र पूरा कर सके है , परन्तु पिछले कुछ दिनों से कुछ बड़ी कंपनी लोगो को अन्तरिक्ष में ले जाने कि सोच रही है , शायद यह सपना जल्द ही पूरा हो जायेगा . परन्तु आपको आज हम आपको एक आश्चर्यजनक बात बताने वाले है जिस पर शायद ही आपको विश्वास हो पर यह सत्य है . जब कोई मानव अन्तरिक्ष में जाता है तो उसके शरीर में बहुत से बदलाव आते है इसलिए जब कोई व्यक्ति अन्तरिक्ष में जाता है तो उसको अपने शरीर और सेहत कि सही से ख्याल रखने कि ट्रेनिंग दी जाति है .उसको अपनी मांसपेशियों और शरीर को मजबूत बनाने के लिए लगातार अभ्यास करना होता है .

अन्तरिक्ष में जाने पर कानों और दिल पर प्रभाव

आपको जानकर थोड़ा अजीब लगेगा कि अन्तरिक्ष में दिल का आकार थोड़ा कम हो जाता है और और इसके धडकने कि क्षमता में भी कमी आती है . दिल सिकुड़कर पूरी तरह गोल हो जाता है इसके साथ साथ कान का अंदरूनी हिस्सा भी सिकुड़कर गोल हो जाता है .

नाखूनों पर प्रभाव

अगर अन्तरिक्ष यात्री अपनी सेहत पर ख्याल न रखे तो उसके नाखून भी अलग होकर गिर सकते है .

लम्बाई बढ़ जाती है परन्तु देखने कि क्षमता हो जाती है कम

अन्तरिक्ष यात्रियों कि लम्बाई अन्तरिक्ष में जाने पर कुछ इंच बढ़ जाती है . अन्तरिक्ष में लम्बाई बढ़ने का कारण गुरुत्वाकर्षण का अनुपस्थित होना है . वहीँ यह भी माना जाता है कि ज्यादा समय तक अन्तरिक्ष में रहने पर देखने कि क्षमता में भी कमी आ जाती है .आँखों के इस दोष को विज्ञान में VIIP ( विजुअल इम्पेयर्मेंट प्रेशर सिंड्रोम है .

रेडिएशन का अधिक होना

अन्तरिक्ष में पृथ्वी कि तुलना में अधिक रेडिएशन होता है जिसका अन्तरिक्ष यात्रियों पर उल्टा प्रभाव पड़ सकता है . ज्यादा रेडिएशन से उनको स्किन केंसर जैसे रोग भी हो जाने कि सम्भावना रहती है .

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