लौह पुरुष सरदार वल्ल्भ भाई को समर्पित इस कविता को केवल सच्चे देशभगत ही पढ़े

सरदार वल्ल्भ भाई पटेल ने भारत देश को संगठित करने में अहम भूमिका अदा की थी।  इसलिए ये लौह पुरुष के नाम से जाने जाते थे।  इस महान शख्सियत पर कवि शोभित सूर्य ने एक कविता बनाई है  जो आपके लिए पेश है , इस कविता को ज्यादा से ज्यादा शेयर ताकि यह हर देशवासी तक पहुँच सके —

भारत ने पाई आजादी ,पर कुछ सपने टूट गये।।

पेशावर ,लाहौर ,कराची,समझौतों में छूट गये।।

कुछ राजा अपने -अपने गढ़ लेकर मद में फूले थे।।

वीरों का बलिदान भूलकर , सत्ता मद में झूले थे।।

खंड खंड थे इस भारत के ,कुछ की अलग रियासत थी।।

उसी दौर में उस बेटे की सबसे अलग सियासत थी ।।

राजाओं को समझाया सबसे पहले अधिकार किया।।

उसकी बातें कुछ ऐसी थी सबने ही स्वीकार किया।।

अटल रहा जो,अडिग रहा जो हरदम अपने वादों पर ।।

पानी फेरा था निजाम के कुत्सित सभी इरादों पर।।

गौरवशाली जिसके होने से अपना इतिहास हुआ।।

लौहपुरूष होने का दुश्मन का प्रतिपल आभास हुआ।।

गाँधी जी के हर सपने का ,जिसने था विस्तार किया ।।

जिसने केवल मातृभूमि के हित ही सदा प्रचार किया ।।

भारत का दुर्भाग्य रहा शायद वह बना प्रधान नहीं ।।

और तभी कश्मीर समस्या का हो सका निदान नहीं।।

गाँधी बापू गद्दारों पर आप नकेल लगा जाते।।

यदि पीएम की कुर्सी पर सरदार पटेल बिठा जाते।।

                                           शोभित तिवारी सूर्य

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