1971 कि लड़ाई में जीत के बाद बांग्लादेश को भारत में क्यों नहीं मिलाया गया

1971 कि लड़ाई में पाकिस्थान को हराने के बाद भारत ने खुद को दक्षिण एशिया कि महाशक्ति के रूप में खड़ा कर लिया था . भारत ने इस लड़ाई को जीतकर 13 दिनों में ही पाकिस्थान का नक्शा बदल दिया था . भारतीय लोगो के जहन में यह सवाल अक्सर आता है कि इतनी बड़ी लड़ाई जितने के बाद भी बाग्लादेश को भारत में क्यों नहीं मिलाया गया ? या 1971 की लड़ाई में जीत के बाद इन्दिरा गाँधी ने बांग्लादेश को भारत में विलीन क्यों नहीं किया . आइये जानते है इसके बड़े कारण

1971 कि लड़ाई में जीत के बाद बांग्लादेश को भारत में क्यों नहीं मिलाया गया

भारत और बांग्लादेश के गुरिल्ला बलों के बीच युद्ध हो सकता था 

भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी RAW ( रिसर्च एंड एनालिसिस विंग ) ने बांग्लादेशी गुरिल्ला बल मुक्ति बहिनी को हथियार और प्रशिक्षण देकर पाकिस्थान के विरुद्ध खड़ा किया था , जिसका एकमात्र उद्देश्य था बांग्लादेश की आजादी .

अब अगर पाकिस्थान से आजाद होने के बाद भारत बांग्लादेश पर कब्ज़ा करता तो ये गुरिल्ला बल भारत के विरुद्ध खड़े हो सकते थे और भारत को एक युद्ध और करना पड़ता .

पूरे विश्व में खराब हो सकती थी भारत की छवि 

बांग्लादेश को पाकिस्थान से आजाद करने के बाद भारत की छवि एक मसीहा के समान बन चुकी थी . इस समय भारतीय सेना को बांग्लादेश में बहुत प्यार और स्नेह मिल रहा था . इसलिए इस नए आजाद देश पर कब्ज़ा करना नैतिक ओर रणनीतिक रूप से गलत होता .

भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता –

उस दशक में भारत खुद ही अपनी लगातार बढ़ रही आबादी , गिरती अर्थव्यवस्था , और भयकर गरीबी से जूझ रहा था . अगर बांग्लादेश को भी भारत में मिला लिया जाता तो बांग्लादेशियों का पेट पालना भी असंभव होता . इससे हजारो जाने जा सकती थी .

भारत और पश्चिम देशो के मध्य सबंध खराब हो जाते –

1971 के युद्ध में पश्चिम देशो जैसे अमेरिका ब्रिटेन ने पाकिस्तान का भरपूर साथ दिया था , यहाँ तक कि अमेरिका ने तो भारत को पीछे हटाने के लिए अपना जंगी जहाज तक भेज दिया था परन्तु भारत ने हार न मानते हुए बांग्लादेश को आजाद करा लिया था .

 अब अगर भारत बांग्लादेश पर कब्ज़ा करता तो अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशो को भारत पर अंगुली उठाने का मौका मिल जाता . और रूस से भी हमारे रिश्ते खराब हो सकते थे .

भविष्य में एक मजबूत साथी बन सकता है बांग्लादेश 

वर्तमान में बांग्लादेश तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा है और गरीबी को हटा रहा है . शायद ऐसा भी हो सकता है कि यह देश एशिया कि एक नई शक्ति बनकर उभरे . अगर हमारे रिश्ते बांग्लादेश से अच्छे होंगे तो भविष्य में हमें एक उपयोगी और सैन्य मित्र मिल सकता है

इतिहास से जुड़ा अगर आपको कोई सवाल है तो आप कमेंट में लिखे .

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